AQI
(AIR QUALITY INDEX)

AQI(AIR QUALITY INDEX ) के मुताबिक हवा हुई बहुत प्रदूषित, पंजाब और दिल्ली खतरे के निशान पर। 

AQI (AIR QUALITY INDEX ) के मुताबिक पंजाब और दिल्ली की हवा इस क़दर दूषित हुई पड़ी है कि सांस लेना तक दुष्वार हो गया है,दिल्ली में तो हवा इस क़दर तक जानलेवा बनी पड़ी है की वहाँ पर सरकार को लॉकडाउन तक घोषित करना पड़ा। पंजाब के कुछ शहरों की हवा भी जानलेवा बनी पड़ी है,जालंधर जैसे शहरों की हवा तो इस कदर प्रदूषित हैं कि सांस लेना तक दुष्वार हो गया है। केजरीवाल दिल्ली के मुख्यमंत्री ,उन्होंने प्रदुषण के बढ़ते खतरे को  देख स्कूल ,कॉलेज बंद करने की घोषना कर दी। पर जालंधर जैसे शहरों में इसके खिलाफ कोई कदम नहीं उठाया। दिल्ली और पंजाब की हवा इस समय किस हद तक दूषित है ,AIR QUALITY INDEX की मदद से जानते हैं। 

क. (0 – 50) =सामान्य (सांस लेने के लिए फायदेमंद,सेहत के लिए उपयोगी )

ख.(50 -100)=मध्यम (कुछ हद तक बेहतरीन ,सांस लेने के लिए लगभग उपयोगी )

ग.(100 -150)=संवेदनशील समूह के लिए हानिकारक 

घ.(150 -200)=हानिकारक 

ड.(200 -300)=बहुत  ज्यादा हानिकारक 

च.(300 -500)=  जानलेवा 

इस क्रमांक के अनुसार दिल्ली और पंजाब के कुछ शहर जैसे की जालंधर दोनों इस समय हाई अलर्ट पर चल रहे हैं। 

क्यूंकि इस समय दोनों की हवा का स्थिति देखी जाए तो वो लगभग (300 -500) के बीच चल रहा है। जो की आप की सोच से भी बहुत खतरनाक है।

हवा के इस कदर प्रदूषित होने से गंभीर हानिया:-

  क.  पहले तो हवा के इस कदर प्रदूषित होने से सांस लेने में दिक्कत आ जाती है,लोगो में दमा ,अस्थमा की शिकायत ज्यादा सामने आने लगती है  जो की धीरे-धीरे उन्हें  मौत की तरफ ले जाता है।

ख. प्रदूषित हवा से आँखों में जलन उत्पन होता है।      

 ग .  हवा के प्रदूषित होने के कारण सिर्फ दिल्ली में हर साल लाखों लोगो की मौत हो रही है,और रोज हज़ारो लोग अस्थमा और दमा के नए मरीज बनकर सामने आ रहे हैं जो कि एक गंभीर चिंता का विषय है।  

WHO के रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली में प्रदुषण से मरने वालों की संख्या पूरी  दुनिया के  मुकाबले सब से ज्यादा है। यहाँ तक की दिल्ली को एक “किलर” शहर भी कहा गया है। 

प्रदुषण से लगभग हर साल सिर्फ दिल्ली में लाखों लोगो की मौत अपने आप में एक गंभीर चिंता का विषय है। आखिर क्यों नहीं देश की सरकार इस के खिलाफ कोई कदम उठा रही ?क्यों आम नागरिको को यूँ ही मरने के लिए छोड़ दिया जा रहा है? लॉकडाउन के दौरान जब फ़ैक्टरिया ,कारखाने सब बंद थे तब प्रदुषण बिलकुल अपने न्यूनतम स्तर पर था। लेकिन जब से लॉकडाउन खुला ही तब से प्रदुषण अपने उचत्तम स्तर पर पहुँच गया है।  सरकार अगर कुछ सख्त कदम उठाये तो शायद कुछ दिनों में लोग वापस सुकून से अपने घरो के बाहर आ-जा सकते हैं। बचे बाहर खेल सकते हैं,अपने आप को तंदरुस्त रख सकते हैं। पर इस समय दिल्ली का वो हाल है की निर्देश जारी करने पड़े जैसे कि हमेशा मास्क का उपयोग करे ,बाहर न निकले ,कोई बाहरी गतिविधि न करें,हवा को शुद्ध करने वाले मशीन का उपयोग करे। इंसान अपनी रोजाना गतिविधि करने से वंचित होता जा रहा है।

सरकार द्वारा उठाये गए कुछ कदम :-

  •  सरकार के निर्देशानुसार पेट्रोल और डीजल की जगह CNG का इस्तेमाल करे। 
  •   सरकार ने PUC(POLLUTION UNDER CONTROL ) सर्टिफिकेशन                                 

         अनिवार्य कर दिया है उन गाड़ियों के लिए जो की पेट्रोल पर चलती है।  

  ग. सरकार ने सिर्फ वही डीज़ल इस्तेमाल करने का निर्देश दिया है जो साफ़ हो  और  जिसमे पीपीएम सल्फर की मात्रा 550 पीपीएम हो जो की गाड़ियों के लिए साफ़  ईंधन माना जाता है। 

     इतना सब के बाद भी आज प्रदुषण में कोई नियंत्रण नहीं है और प्रदुषण तेजी से बढ़ रहा है,और दिन-ब-दिन जानलेवा बनता जा रहा है। आम इंसान को भी इसको रोकने के लिए आगे आना पड़ेगा।कुछ तरीको से हम खुद भी प्रदुषण को काम कर सकते हैं जैंसे की :-

पंजाब में अक्सर प्रदुषण का कारण बनता है पराली जलाना।दिवाली पर पटाखे जलाना, 

     ये दो कारण ही है जिसके कारण पंजाब में प्रदुषण बहुत ज्यादा बढ़ गया है। इसके लिए पराली को जलाने से बढ़िया उसे खेतों में ही हल के छोड़ दिया जाए ताकि वो खेतों में ही सड़ के खाद का रूप ले ले। इसे खेतों की मिटटी को बहुत फायदा होगा।

     दूसरी और पटाखों के खिलाफ भी सख्त कदम उठाने चाहिए ,पूरी तरह से बंद न कर पा रहे हो तो काम से कम उसपे कुछ सीमाएं लगाई जाए ताकि लोग जयादा पटाखों का इस्तेमाल न करे और वातावरण कम से कम दूषित हो।