भारतीय सेना अपनी सैन्य क्षमताओं को बढ़ाने के लिए बहुत जल्द ही सेना में swarm drone systems को शामिल करने वाली है।  

आपको  बता दे की बॉटलैब डायनेमिक्स, आईआईटी दिल्ली में इनक्यूबेट किया गया स्टार्टअप, पिछले 5 वर्षों से स्वान ड्रोन सिस्टम पर काम कर रही है। स्टार्टअप का कहना है की इन्होने ऐसे सिस्टम त्यार कर लिए है जो एक साथ 3500 ड्रोन को कण्ट्रोल कर सकता है। और अब यह स्टार्टअप इसकी क्षमता को 7500 तक करने पर विचार कर रही है। जिसके लिए कंपनी ने प्रस्ताव भी दिए है। 

इनकी सबसे खास बात यह है की ये सारे ड्रोन AI बेस सिस्टम से कण्ट्रोल होगा। यानि ये खुद ही पहचान कर सकता है की हमें कहां पर हमला करनी है। 

इसका उपयोग आक्रामक और रक्षात्मक दोनों ऑपरेशनों के दौरान भी किया जा सकता है

भारतीय सेना ने swarm drone systems को शामिल करके अपनी ड्रोन क्षमताओं को बढ़ने पे जोर दे रही है। जिसका उपयोग आक्रामक और रक्षात्मक दोनों अभियानों के दौरान किया जा सके।

क्या है SWARM DRONE 

SWARM DRONE ड्रोनों के समूहों का एक झुण्ड होता है इन ड्रोनों में विफोटक पदार्ध भरे होते है। इनका काम टारगेट पे गिरकर उन्हें नस्ट करना होता है। 

जिसमे हजारो ड्रोन एक साथ दुश्मन पर हमला करते है जिसके कारण दुश्मन का डिफेन्स सिस्टम इतने सरे ड्रोन को नस्ट नहीं कर पाता है। और ये ड्रोन दुश्मन देश के डिफेन्स सिस्टम को नस्ट कर देते है। डिफेन्स सिस्टम के बिना हमारा लड़ाकू विमान दुश्मन देश में आसानी से हमला कर सकता है। 

SWARM DRONE बनाना  क्यों है इतना मुश्किल 

SWARM DRONE में हजारो के संख्या में ड्रोन होते है जिनको एक साथ ,महज कुछ ही दुरी पर हवा नियंत्रित करना बहुत ही मुश्किल काम है। इसलिए अभी तक सभी देश इसे बनाने में लगे हुए है। अच्छी बात ये है की भारत का ये प्रोग्राम बहुत ही एडवांस स्टेज पर पहुंच चूका है। 

ड्रोन सेना के लिए क्यों है इतना जरुरी

ड्रोन तकनीक वर्तमान समय में युद्ध निर्णायक साबित हो रही है। ये सेना को मजबूत बनाने में बहुत ही फ़ायदेमंद साबित हो रही है। इस बात की पुस्टि हाल की हुए युधो में देखने को मिला है। 

दुनिया भर में हाल के विभिन्न संघर्षों में, विशेष रूप से आर्मेनिया, अजरबैजान, सीरिया और सऊदी अरब में तेल क्षेत्रों पर हमले और हाल ही में रूस-यूक्रेन युद्ध में ड्रोन के उपयोग ने दुनिया को ड्रोन के महत्व को बता दिया है। 

ड्रोन हमें “हमें निगरानी इनपुट प्रदान करने में सक्षम है। आज के समय में सैटेलाइट के बाद निगरानी के लिए ड्रोन ही उपयोग किये जा रहे है। ड्रोन का उपयोग आज के समय में एक विशेष क्षेत्र की बारीकी से जांच करना, वाहनों, तोपखाने और वायु रक्षा उपकरण, दुश्मन कमान और जैसे विभिन्न लक्ष्यों को नस्ट करनेमें किया जा रहा है ।

SWARM DRONE  प्रणाली में कई हवाई वाहन होते हैं जो आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस (एआई) के द्वारा नियंत्रण किये जा सकते है। और ये स्टेशन के साथ-साथ आपस में संचार करने में भी सक्षम होते हैं। एआई-आधारित सिस्टम SWARN DRONE  को स्वचालित रूप से आपस में कार्यों को वितरित करने, दुश्मन के क्षेत्र में नेविगेट करने, युद्ध  के दौरान टकराव से बचाव सुनिश्चित करने और क्षेत्र की खोज करने में सक्षम बनाता है।

एआई-आधारित स्वचालित लक्ष्य पहचान (एटीआर) सुविधा ड्रोन को स्वचालित रूप से लक्ष्य जैसे  टैंक, बंदूक, वाहनों और मनुष्यों को पहचानने और उन्हें नियंत्रण स्टेशन स्क्रीन पर प्रदर्शित करने में सक्षम बनाती है, इस प्रकार ऑपरेटर द्वारा किसी भी लक्ष्य को खोने की संभावना को कम करता है और एक साथ हमला करने की सुविधा भी देता है। 

“इस विशिष्ट तकनीक को शामिल करने के लिए, भारतीय सेना ने दो भारतीय स्टार्टअप कंपनियों से SWARM DRONE  खरीदे हैं। 

सेना द्वारा जारी बयान में कहा गया है, “यह खरीद भारतीय सेना द्वारा उभरती और विघटनकारी प्रौद्योगिकियों भारतीय के आलिंगन की मान्यता है, जो भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए खुद को जनशक्ति-गहन से प्रौद्योगिकी-सक्षम बल में बदलने के लिए है।”